मौहब्बत पाक रूह का तोहफा

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मौहब्बत कुछ और नहीं बस पाक रूह का तोहफा है। इन मौहब्बत कि इमारतों पे यूँ तालें ना लगाओ। कभी जात के, कभी उम् के, कभी कस्बों के, कभी पैसों के, कभी रंग के, कभी ढंग के, कभी खुद मौहब्बत के ही….

एक बार इस मौहब्बत में खुद कैद हो कर तो देखो, चाबी होगी नहीं हाथ में और ये तालें खुद-बे-खुद टूट जायेंगे।

यूँ कैद ना करो उन हज़ारों मोहब्बतों को जो पाक दिल में सारी चाबियाँ ले कर घूमते हैं। एक बार उड़ जाने दो उन सब मौहब्बतों को, फिर देखो हर घर में मौहब्बत के फरिश्ते नज़र आएंगे…

क्यूंकि मौहब्बत कुछ और नहीं बस पाक रूह का तोहफा है।

Our First Date…

 

I wish we would have gone on our first date…

My eyes would have played with your eyes… They would’ve talked in the silence of our breath… Still confused where to look… Walking oa long lane with no thoughts at all… Your fingers would be rubbing with my fingers making me feel to hold your arm We would have stopped on an ice-cream parlor… I feel I would have ordered all flavors… You were looking at me to share those cones…

I will be hoping the life stays forever like our FIRST DATE…

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